STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

4  

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

बहार

बहार

1 min
190

ग़ज़ल


अब तो दिलों में नफ़रत की दरार है 

आती कहा मुहब्बत की दयार है


मौसम है ये कैसा बेदर्द सा मगर 

ख़ुशहाल की नहीं आयी बहार है


मैं तो तड़फता हूँ हर पल ख़ुशी को ही

कब दिल को मगर यहां मेरे करार है 


ए दोस्त क्या करुँगा शहर जाकर के 

की कौन करता मेरा इंतजार है 


है अजनबी यहां चेहरे हूँ तन्हा मैं 

कोई भी तो नहीं अपना देखो यार है 


दुश्मन मिटा दूँ मैं आज़म अपने सभी 

नफ़रत दिल में मेरे ही बेशुमार है।

आज़म नैय्यर 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract