बेटी की विदाई
बेटी की विदाई
कल की ही तो बात है
तू मेरे गोद में आई
तेरी किलकारियों ने
घर मेरी खूब गुंजाई
तेरी मुस्कानों से हर दिन
मेरा खिलखिलाया था
घुटनों के बल चल-चल कर
तुमने खूब मुझे सताया था
नन्हे कदमों से भागकर तूने
मुझे भी खूब भगाया था
सारे घर वालों पर तूने
आसमान सर पर उठाया था
तेरी प्यारी प्यारी बातें रोज
मुझे तो छलती थी
तेरी प्यारी नटखट हरकतें
मेरे मन को छूती थीं
देखते ही देखते
तू आज बड़ी हो गई
तेरी हर एक बात
मेरे मन को गर्व से भर गई
आज तुम्हें यूं देखकर
ऑंखें भर -भर आई
तुझे दुल्हन रूप में देखकर
लग रहा है कैसे करूं विदाई
घर के बाहर खड़ी है डोली
देख रही हूं सच्चाई
मुझसे बिछड़ने के लिए ही तो
शायद तू मेरे जीवन में आई
जीवन भर की खुशियों को
ले जा साथ सदा तू
मैं मिलूंगी खड़ी यही
जब भी मुड़ कर देखेगी तू
आज वो मुझसे लिपटकर
जाने किस ओर चली
मेरा तो सब कुछ ले वो
जानें किस देश चली
आज एहसास हुआ उम्र का
जब बेटी की उठी डोली
सब कुछ खाली हो गया
जब बेटी दूर चली
जा बेटी खुश रहना तू
मैंने दुनिया की रीत निभाई
तेरी खुशियों के लिए
कर रही तेरी विदाई
