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Manju Yadav

Tragedy

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Manju Yadav

Tragedy

बेरोजगारी

बेरोजगारी

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बेरोजगारी की हाल में अब तो दम घुटने लगा है ,

ये रोज रोज की सरकार में अब दम घुटने लगा है ,

ये व्यथा अब तो हर किसी को मारे जा रही है ,

इस व्यथा को कहने में अब तो दम घुटने लगा है ।

एक उम्र में आकर शिकायतें , हिदायते , इत्मीनान

कयामतें , रंजोगम सब बस शब्द नजर आती है

इनायतों की इबादत में अब तो दम घुटने लगा है ,

रोज अखबार में छपती है कई विभागों की भर्तियां ,

खाने के और दिखाने के और हाथी दांत जैसी ही,

कम्पटीशन की रफ्तार में अब तो दम घुटने लगा है।

          


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