STORYMIRROR

Pinki Khandelwal

Inspirational

4  

Pinki Khandelwal

Inspirational

बदलता मौसम सिखाता एक सबक....।

बदलता मौसम सिखाता एक सबक....।

1 min
322

सांझ की धूप और भोर की लालिमा हो,

सावन की बरसात और पतझड़ का मौसम हो,

शरद की हवाएं और कोहरे की धुंध हो,

ग्रीष्म की तपती धूप और सर्दी की ओस हो,


दिन रोज ढलता है भोर की लालिमा फिर दिखती है,

मौसम बदलते रहते सावन आते जाते रहते,

कभी धूप कभी छांव पल भर बदलती सुबह और शाम,

हवाओं का बहना घटाओं का बरसना,


ग्रीष्म की तपन शरद की ठंड,

बदलता रहता मौसम बस नहीं बदलता सांझ का ढलना,

मौसम चाहे कोई हो किसान अपनी खेती नहीं छोड़ता,

दुकानदार अपना व्यापार बंद नहीं करता,


दर्जी कपड़े सिलना कुम्हार घड़े बनाना,

फिर क्यों इंसान अपना रंग बदल लेता,

क्यों समयानुसार अपनी पहचान बदल लेता,

आज उसके साथ अच्छा कल उसके साथ बुरा कर जाता,


क्यों नहीं समझता हर अंधेरी रात के बाद सुनहरी भोर होगी,

आज मुश्किलें बेशक है कल खुशियों की बहारें बरसेगी,

क्यों हर मौसम की भांति अपने रंग बदलता रहता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational