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Suresh Koundal

Romance


4.9  

Suresh Koundal

Romance


बड़े प्यारे हैं लब तेरे

बड़े प्यारे हैं लब तेरे

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बड़े प्यारे हैं लब तेरे ,

दीवाने हो गए सब तेरे ।

फूलों का नूर ले कर ,

यौवन भरपूर ले कर ,

सुर्ख लाल शहद के प्याले ,

कोई कैसे खुद को सम्भाले,

ये महकते गुलाब से,

इक नशीली शराब से ,

चैन उड़ा ले गए मेरे ।

बड़े प्यारे हैं लब तेरे ,

दीवाने हो गए सब तेरे ।

दांतों में इनको दबाओ ना,

बेखबर, शर्माओ ना,

पंखुड़ियां फड़फड़ाओ ना ,

यू बेचैनियां बढ़ाओ ना ।

बन गए हैं कातिल ये मेरे ।

बड़े प्यारे हैं लब तेरे ,

दीवाने हो गए सब तेरे ।

बाहों में भर कर झूमने का है मन मेरा ,

इन लबों को चूमने का है मन मेरा ,

अपने लबों से इन लबों को गीला कर दूँ ,

इन रसीली कोंपलों को और भी रसीला कर दूं ।

बारिश में भीगना तो इक बहाना है ,

लबों पे तेरे जो पड़ी उन पानी की बूंदों को,

लबों से अपने मुझको तो उठाना है ।

अरमां ये दिल में है मेरे ,

बड़े प्यारे हैं लब तेरे ,

दीवाने हो गए सब तेरे ।


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