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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

बचपन

बचपन

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अपना बचपन क़ैद कर के, 

ये बाल मन संयमित कर के, 

परिवार के लिए त्याग करें, 

दो वक़्त रोजी रोटी के लिए। 


सारा दिन या रात तलक भी, 

कितना बाल मन काम करें, 

सुबह जल्दी से उठते हैं काम,

 रात को देर तक करें काम। 


खेलने के लिए वक़्त ना ही, 

काम, काम बस करते काम, 

बाल मजदूरी पे रोक लगाई, 

पर पेट के लिए करना भाई। 


अपना बचपन क़ैद करते हैं, 

कुछ बच्चे बचपन में बड़े हो, 

पढ़ाई लिखाई करना चाहते,

 पर परिवार पालने है ज़रूरी।



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