STORYMIRROR

Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

3  

Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

बचपन का घर

बचपन का घर

1 min
408

बचपन का वो,

घर.......... याद आता है।


भोलेपन का वो,

संग-साथ याद आता है।

वो छोटा-सा अपना

घर......... याद आता है।


किराये के मकानों के बाद,

अपने घर का,

अपनेपन का,

एहसास याद आता है।


बचपन का वो,

घर........ याद आता है।


जिंदगी कितनी जल्दी,

जिम्मेदार हो गई।

वो बेपरवाह खेल,

घर की छत का,

चौबारा याद आता है।


बचपन का वो,

घर........ याद आता है।


वो घर के,

दरवाज़े के पीछे,

छिप कर,

डराना याद आता है।

वो रूठना-मनाना,

याद आता है।


वक्त ने जिसे,

छीन लिया।

वो अपना घर,

याद आता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract