बच्चे
बच्चे
बच्चे लड़ते है
झगड़ते है
और लड़ाई -झगड़ा कितना
बड़ा भी क्यों न हो
सब कुछ भूलकर
बच्चे फिर से दोस्त बन जाते है
एक पल में ही
भूल जाते है लड़ाई की बातें
अपनों के बीच दुश्मनी भूलते है
और फिर से दोस्त बन जाते है
आशा करता हूँ, हम भी
उन बच्चों जैसा
गुस्सा, हिंसा और द्वेश
सबकुछ छोड़कर
एक सुनहारी
समाज का निर्माण करेंगे
