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Brijlala Rohanअन्वेषी

Classics Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Classics Inspirational

'बचा केवल मैं अकेला'

'बचा केवल मैं अकेला'

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जो साथ चले थे जाने कब अपनी-अपनी

राह पकड़ कहाँ निकल गए !

बचा केवल मैं अकेला, सब बीच अधर में मुझे छोड़ गए।                                  

खाली दिल ढूंढ रहा दिखती नहीं कोई आश की किरण,

तंग आ गया मैं जीते मैं रंगहीन जीवन।                 


जो कल तक जोहते थे मेरा आसरा,

डूबते ही मेरी नैया वो अब आकाश हो गए।

मैं बच गया अकेला,वो जिंदगी की परीक्षा में पास हो गए।                      

न बचा अब कोई साथी, न मिल रहा किसी का सहारा     


बिन हमसफ़र, अकेले ही हम फिर से बढ़ चले,

मंजिल मिलने पर उमड़ेगी काफ़िला दोबारा।                

खत्म होते ही मेरा खजाना, सब खल्लास हो गए,

मैं बच गया अकेला सब अपनी- अपनी आगार चले गए।        


कल तक जिनके भरोसे पर हम टिके थे,

साथ निभाने की जब बारी आयी निराश कर गए।                   

जो साथ चले थे जाने कब अपनी- अपनी राह कहाँ निकल गए !


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