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Anjali Singh

Abstract Romance

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Anjali Singh

Abstract Romance

बैरी चाँद

बैरी चाँद

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आसमान में चाँद क्यूँ अकेला है

रौशनी भी तो आयी है 

तारों की भीड़ भी है

फिर आसमान में 

चाँद क्यूँ

अकेला


रात अंधेरी है पास 

उसके रौशनी है 

पर बैर निभाए

साथ उसके

चकोर


बैरी चाँद हो गया है पर 

आज भी इंतजार है

चाँद को अपनी

चकोर का


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