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Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


4.5  

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


"बाते जलन की"

"बाते जलन की"

1 min 230 1 min 230

आज वो ही बाते कर रहे जलन की

जिनके हृदय में भरी बातें घमंड की


वो जो खुद को शहंशाह समझते है,

दूसरे लोगों को यहां मूर्ख समझते है,


वो ही बातें कर रहे इंसानियत की

जिनके मुँह में बूंदे,स्वार्थी लहूं की


जिनके दीयों में दिखावे की रोशनी,

वो ही बाते करते,आदर्शों की बनी,


जिनकी खुद की जिंदगी अंधेरे की

वो ही बातें कर रहे आज आईने की


तू साखी ज़रा फिक्र न कर लोगों की

इनको आदत है,कुत्ते जैसे भौंकने की


तू बस चलता चल अपनी ही मस्ती में,

तू पहनकर चल सदा माला सत्य की।


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