Shishpal Chiniya
Tragedy
बारिश गिर रही थी मेरे ऊपर,
तो मैंने सोचा ये कड़वी क्यों है,
फिर पता चला आँखों से गिर रही हैं।
मेरे हमसफर
रस्सी
दर्द
शुन्य
ये लम्हे
ईश्क़
बारिश
बस यूं ही
जान
हद है
ये गर्म हवाएं और शीतलता की बेरुखी। इतनी गर्मी में अंतर तक हो रहे लोग दुखी। ये गर्म हवाएं और शीतलता की बेरुखी। इतनी गर्मी में अंतर तक हो रहे लोग दुखी।
चल लड़ते हैं यार,जनता के नाम पर, छल करते हैं यार,जनता के नाम पर!। चल लड़ते हैं यार,जनता के नाम पर, छल करते हैं यार,जनता के नाम पर!।
अपने अपने क्षितिज का माप देखना है ; अपने कर्मों की आंच पर भविष्य सेंकना है ! अपने अपने क्षितिज का माप देखना है ; अपने कर्मों की आंच पर भविष्य सेंकना है !
अपनी कहानियों की कल्पनाओं से दूसरे को रिझाता है अपनी कहानियों की कल्पनाओं से दूसरे को रिझाता है
अपनी -अपनी प्रतिभाओं के प्रदर्शन में सब लगे हुए हैं। अपनी -अपनी प्रतिभाओं के प्रदर्शन में सब लगे हुए हैं।
उस हवा की जोर से तेरी ओर आऊंगा मैं उस हवा की जोर से तेरी ओर आऊंगा मैं
ईमान ही इबादत , कर्म ही किस्मत है , सफल जीवन का यही एक राज है साहब।। ईमान ही इबादत , कर्म ही किस्मत है , सफल जीवन का यही एक राज है साहब।।
पांच-पांच महारथियों की वह पत्नी थी, जो हार गये थे बिन पूछे उसे चौसर की बाज़ी में पांच-पांच महारथियों की वह पत्नी थी, जो हार गये थे बिन पूछे उसे चौसर की बाज़ी में
जो सोच रहे हैं,वो हो नही रहा है जो चाह रहे हैं,वो हो नही रहा है। जो सोच रहे हैं,वो हो नही रहा है जो चाह रहे हैं,वो हो नही रहा है।
पीढ़ी दर पीढ़ी इन्हीं परम्पराओं का यथावत निर्वाह होता है। पीढ़ी दर पीढ़ी इन्हीं परम्पराओं का यथावत निर्वाह होता है।
आज चारों ओर एक नीरवता है फिर भी चीखता सन्नाटा है। आज चारों ओर एक नीरवता है फिर भी चीखता सन्नाटा है।
तुम थे तो मानता भी रोज था तुम थे तो मानता भी रोज था
रेत को तन पर लपेटे देर तक, औंधे मुँह किये लेती रही...!! रेत को तन पर लपेटे देर तक, औंधे मुँह किये लेती रही...!!
मुस्कराहटें भी, बेदम होकर गिरी। ख़ुशियाँ पैसों की, शुक्रगुजार हुई।। मुस्कराहटें भी, बेदम होकर गिरी। ख़ुशियाँ पैसों की, शुक्रगुजार हुई।।
दायरा तेरी रियासत का फिर तय हुआ रसोईघर तुझे फिर राज करने लिए मिला दायरा तेरी रियासत का फिर तय हुआ रसोईघर तुझे फिर राज करने लिए मिला
सीमा बदलने को मजबूर कर देता है। सीमा बदलने को मजबूर कर देता है।
हर पल रहती तू दिल में मेरी हँसी खुसी दर्द तकलीफों में। हर पल रहती तू दिल में मेरी हँसी खुसी दर्द तकलीफों में।
मुझे आज तक समझ नहीं आया कि आखिर वो मुझमें चाहता क्या है.. मुझे आज तक समझ नहीं आया कि आखिर वो मुझमें चाहता क्या है..
हमने सब कुछ अपना लुटा दिया, अपनी चाहत का सिला दिया, हमने सब कुछ अपना लुटा दिया, अपनी चाहत का सिला दिया,
दर-दर की ठोकरें खाता है मजबूरी में मासूम, बालश्रमिक बन जाता है। दर-दर की ठोकरें खाता है मजबूरी में मासूम, बालश्रमिक बन जाता है।