Shishpal Chiniya
Abstract
कोई शख्श नहीं लटकता हैं
बस मजबूरियां लटकती हैं।
मेरे हमसफर
रस्सी
दर्द
शुन्य
ये लम्हे
ईश्क़
बारिश
बस यूं ही
जान
हद है
निष्प्राण पुष्प और कली सिसकती, पीड़ा आँसू आँगन में... निष्प्राण पुष्प और कली सिसकती, पीड़ा आँसू आँगन में...
मुझे वह गाँव का अलमस्त जीवन याद आता है। मुझे वह गाँव का अलमस्त जीवन याद आता है।
तुमसे फिर कोई शिकायत नहीं होगी तुम्हारी ख़ामोशी मेरी यात्रा में एक अनोखा योगदान होगी तुमसे फिर कोई शिकायत नहीं होगी तुम्हारी ख़ामोशी मेरी यात्रा में एक अनोखा...
कभी चाँद कभी तारों से, तो कभी बहती हुई नदियों से; अपना ही परिचय पूछने लग गये... कभी चाँद कभी तारों से, तो कभी बहती हुई नदियों से; अपना ही परिचय पूछने लग गये.....
मनवा लगाए बैठे सपनों के बाग़ रे, अब न सुनी है मेरी कोई भी बात ये... मनवा लगाए बैठे सपनों के बाग़ रे, अब न सुनी है मेरी कोई भी बात ये...
सच मानों तो ... अब यह शब्द मुझे विवश करें इतनी इनकी ....औकात नहीं । मैं नारी हूँ ... नारी मेरे ब... सच मानों तो ... अब यह शब्द मुझे विवश करें इतनी इनकी ....औकात नहीं । मैं नारी ...
पर यह क्या! सब कुछ गया उबल गैस पर रखी चाय की तरह ही... पर यह क्या! सब कुछ गया उबल गैस पर रखी चाय की तरह ही...
चलो - किसी न किसी दिन बेच दूँगी। चलो - किसी न किसी दिन बेच दूँगी।
अंबर को छूती जाओ इठलाओ, बलखाओ अधूरी चाहत की तरह । अंबर को छूती जाओ इठलाओ, बलखाओ अधूरी चाहत की तरह ।
पथरा जातीं हैं धरती की आँखें, उसके होठों पर पपड़ी जम जाती है... पथरा जातीं हैं धरती की आँखें, उसके होठों पर पपड़ी जम जाती है...
जैसे साइबेरिया से आये तमाम पक्षी खिलखिलाते हैं यहाँ सर्दियों में। जैसे साइबेरिया से आये तमाम पक्षी खिलखिलाते हैं यहाँ सर्दियों में।
मान लेना कुछ दिन की उदासी हो सकती है लेकिन नहीं मानना... ! मान लेना कुछ दिन की उदासी हो सकती है लेकिन नहीं मानना... !
पर्याय ही तो है हम एक दूसरे का। पर्याय ही तो है हम एक दूसरे का।
अभिमंत्रित मंत्र हूँ में प्राण प्रतिष्ठित मूरत हूँ अभिमंत्रित मंत्र हूँ में प्राण प्रतिष्ठित मूरत हूँ
क्योंकि माँ नुमा ये जिल्द अपने पन्नों, को कभी बिखरते हुए नहीं देख सकती है ! क्योंकि माँ नुमा ये जिल्द अपने पन्नों, को कभी बिखरते हुए नहीं ...
घट घट व्यापी महादेव का हर पत्थर में स्पंदन है। अमरनाथ के अमर वंशजों आज तुम्हे अभिवादन है। घट घट व्यापी महादेव का हर पत्थर में स्पंदन है। अमरनाथ के अमर वंशजों आज ...
नए-नए तजुर्बों को अपने में समाता जाए, आख़िर में गहरे समंदर में शामिल हो जाए... नए-नए तजुर्बों को अपने में समाता जाए, आख़िर में गहरे समंदर में शामिल हो जाए...
प्यार देता है आज़ादी प्यार देता है …सिर्फ देता है …लेता नहीं …..। प्यार देता है आज़ादी प्यार देता है …सिर्फ देता है …लेता नहीं …..।
जलते हुए महल, भूमि पे पड़े शव, और बुद्ध का जन्म, बसन्त का आ जाना। बुद्ध का अवाक रह जाना। जलते हुए महल, भूमि पे पड़े शव, और बुद्ध का जन्म, बसन्त का आ जाना। बुद...
jag सुख दुःख दोनों संग चलें,फ़िर हँसना और क्या रोना है। jag सुख दुःख दोनों संग चलें,फ़िर हँसना और क्या रोना है।