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Anita Sharma

Romance

4  

Anita Sharma

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बारिश की बूंदे

बारिश की बूंदे

1 min
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ये बारिश की बूंदें मिट्टी के संग मन भी भिगा जाती हैं,

आ जाती है याद तुम्हारी आंखों से भी बारिश हो जाती है।

इस बारिश के मौसम तक सीमित देखो अपना प्यार रहा,

यूं तो रहा कई वर्षों का साथ पर जब भी हमारा मिलना हुआ

बारिश का मौसम हमारा गवाह रहा।

न कोई वादा तुमने किया न मैने कोई कसमें खाई थी,

मन से तुम बस मेरे थे मेरे दिल में भी तुम्ही समायें थे।

होठों से तो न कभी इकरार हुआ पर 

फिर भी हमने बारिश को साक्षी मान

 जनम जनम की कसमें खाई थी,

जब जुदा हुऐ थे हम दोनों आसमान भी मेरे संग रोया था,

अपने मां बाबा की खातिर दोनों ने इक दूजे को खोया था।

पर वादा है मेरा तुमसे ये हमारा मिलना पक्का होगा,

इस जन्म नहीं मिले तो कोई बात नहीं

पर अगला जनम सिर्फ तेरा होगा।


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