STORYMIRROR

Indira Tiwari

Abstract

3  

Indira Tiwari

Abstract

बारिश के बाद

बारिश के बाद

1 min
302

बारिश के बाद की धूप

छोड़ जाती है बूंदों को

गायब करने वाली अदा,


जिसमें किसी चीज़ को

बदलने की है ताक़त।


धूप सूखा देती है वो लम्हा 

जो गिला पड़ा था 

तुम्हारी मेरी आँखों में।


ये धूप कब कहाँ पड़ती है ? 

कोई नही जानता 

पर दिख जाती है आसानी से 

अपनी मौजूदगी लिए,


बिना किसी आवाज़ के

और ले आती है छांव

तुम वो छांव हो या धूप ?

मैं जानना चाहती हूँ।


जानना चाहती हूँ मैं तुम्हें

 बारिश की बूंद बनकर !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract