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Pranaya Mehrotra

Tragedy Inspirational


4.3  

Pranaya Mehrotra

Tragedy Inspirational


अवसाद

अवसाद

1 min 247 1 min 247

साथ रोने के लिए कोई नहीं तो अवसाद में वो कैसे न रहे,

नाजायज़ अरमानो का बोझ है सर पे तो बताओ कैसे वो बढ़े,


मन है बैठा अशांत पर सबके सामने हस कर वो खड़े,

दिमाग की सुन में असमर्थ तो अपनों से कैसे ना लड़े,


बस एक डर है जिसके डर से वो अपने मन में ही सड़े,

कि जवानी में उसे अपने माँ बाप की कमाई का खाना ना पड़े।


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