अवसाद
अवसाद
कैसी बीमारी है ये
अवसाद की सबको
बच्चा,बूढ़ा और जवान
छोड़ा नहीं किसी को।
नई तकनीक है, सब
सुख सुविधाएं हैं।
अवसाद की वजह से पर
नसें तन तनाए हैं।
जितना प्रकृति से दूर
आधुनिकता की दौड़ है।
सिर से पांव तक हर कोई
डूबा अवसाद की ओर है।
कहने को सारा आकाश बांहों में है
पर हकीकत में घर की छत भी नहीं।
हवा को गुमान था सारे बाग का
आंधियां पेड़ की पत्ते भी उड़ा ले गई।
ऐसा ही हाल, हम सबका है।
अवसाद, चिंता, परेशानी में घूमते हैं।
सब कुछ होते हुए भी रीते रहते हैं।
ये तो कोई शुभ लक्षण नहीं दिखते हैं।
चीजों से ज्यादा, व्यक्तियों पर ध्यान दो,
अपनी सीमाओं को पहचानो।
सब कुछ तुम्हें ही नहीं मिलना
कुछ दूसरों के लिए छोड़ना भी सीखो।
जब दूसरों के लिए कुछ करते हो
कभी मन की खुशी को टटोलना।
वो ही स्थाई होती है, वो ही कमाई होती है
उससे न अवसाद जन्मता है, न घर बर्बाद होता है।
कम इच्छाएं, ज्यादा परिश्रम
जो मिल जाए, उसमें हो प्रसन्न।
उसकी रजा में खुश रहने का धर्म
अवसाद से बचने का ओनली मर्म।
