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Anita Sudhir

Tragedy

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Anita Sudhir

Tragedy

औलाद

औलाद

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बेटे तेरे कृत्यों पर मैं शर्मिन्दा हूँ

कोख शर्मसार हुई, क्यों जिन्दा हूँ।


रब से की थी असंख्य दुआएं,

प्रभु से की मंगलकामनाएं।

पग पग पर आँचल फैलाये

तुम पर कोई आंच न आये।


लाड़ प्यार संग नैतिकता 

का तुमको पाठ पढ़ाया था।

कहाँ हो गयी चूक हमसे,जो

तुमने गलत कदम बढ़ाया था।


लाड़ प्यार के अतिरेक में

तुम बिगड़ते चले गए,या 

तुम्हारी गलतियों को हम

नजरअंदाज करते गए।


कहाँ तुम कमजोर पड़ गए!

क्यों तुम मजबूर हो गए 

एक नेक भले इंसान से  

तुम कैसे हैवान बन गए।


हैवानियत भी आज शरमा रही

तुम संग स्वयं से घृणा हो रही

मेरा दूध आज लजा रहा,

दूसरे को क्या दोष दे,जब

अपना ही सिक्का खोटा हो रहा।


जब मासूमों से दरिन्दगी करते हो 

उनमें अपनी माँ बहने नहीं देख पाते हो।

गरीबों की चीखें सुन नहीं पाते 

बददुआयों से तिजोरियाँ भरते हो।

और भी न जाने क्या क्या 

तुम अपराध किया करते हो।


मेरे बच्चों

मत करो शर्मिन्दा मुझे

अभी समय है चेत जाओ

अपराधों की सजा भुगत 

पश्चाताप कर सुधर जाओ।


नेक रास्ते पर कदम बढ़ा,

दूध का कर्ज चुका जाओ।

देश का भविष्य हो तुम 

समाज में नई चेतना जगा जाओ।


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