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अस्तित्व

अस्तित्व

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मेरी खामोशी इक सवाल है,

मेरी झिझक इक सवाल है,

रास्ते में मेरा आँखें झुका के।


चलना इक सवाल है,

रातों का सन्नाटा मेरा,

डर नहीं इक सवाल है।


दो घरों का हिस्सा हो के भी,

किसी घर का ना होना,

मेरा त्याग नहीं इक सवाल है।


रोज़ किसी पैमाने में,

तुलने की कोशिश करना,

मेरी बेबसी नहीं,

तुझसे इक सवाल है।


चुप से थे कब से ना जाने,

क्यों सवालों के जवाब माँगने लगे,

सवाल जो अनकहे से है,

क्या मेरा वजूद भी तेरा मोहताज है ?


क्या मेरा होना भी इक सवाल है ?

ना होती गर शायद ये शिकन ना होती,

डर ना होता, उम्मीदें ना होती,

हक़ ना होता, दावा ना होता।


क्या मेरा ना होना,

इन सवालों का जवाब है ?

या तेरा होना इन,

सवालों का जवाब है।


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