STORYMIRROR

SURYAKANT MAJALKAR

Romance

2  

SURYAKANT MAJALKAR

Romance

अरमाँ

अरमाँ

1 min
218

और ये मदहोश जवानी।

किसीको न छोड़े दिवानी।


कब आस पूरी होगी मेरी।

कब से तड़पती है जवानी।


चले आओ शाम या सवेरा।

हो सूरज प्रकाश या अँधेरा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance