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Sachin Kapoor

Abstract

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Sachin Kapoor

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अपना सूरज

अपना सूरज

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ऐ मछुआरे 

अपना जाल दे मुझे, 

मिलता है आकाश जहां 

समंदर से 

और डूबता है सूरज जहां 

फैला दूंगा जाल वहां

और डूबने नहीं दूंगा 

अपने सूरज को।


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