STORYMIRROR

Sachin Kapoor

Abstract

4  

Sachin Kapoor

Abstract

तूफ़ान

तूफ़ान

1 min
346

कुछ बातों को यूं कल पर टाला नहीं जाता, 

परेशानियों में अपनो को डाला नहीं जाता। 


कह दे कोई राज जो अपना समझ कर, 

उन बातों को बाजार में उछाला नहीं जाता। 


कुछ कचोट रहा हो मन को, कर दो जाहिर, 

जख़्मों को नासूर बनाकर पाला नहीं जाता। 


कुछ तो है अनकहा सा तेरी आँखों में,

कोई कांटा है जो निकाला नहीं जाता।


एक खामोशी है चेहरे पर, जो शोर मचाती है,

एक तूफान है अंदर, जो सम्हाला नहीं जाता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract