STORYMIRROR

Dinesh Dubey

Abstract

4  

Dinesh Dubey

Abstract

फिक्र

फिक्र

1 min
320

फिक्र क्यों करता है बंदे,

ये सब है कुदरत के फंडे,

सब कुछ उसके हाथ है,

तेरी किस्मत तेरे साथ है।


लिखा दिया है तकदीर उसने,

तु सब कर ले तदबीर से अपने,

फिक्र ना करना कभी यहां तु,

फिक्र देने वाला भी वही है।


कुदरत पर तू कर ले भरोसा,

कुदरत से बढ़ ना कोई पोसा,

सब कुदरत का है खेल निराला,

सबको देता है वही निवाला।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract