STORYMIRROR

Ranjan Shaw

Tragedy Others

3  

Ranjan Shaw

Tragedy Others

अंतिम कविता

अंतिम कविता

1 min
275

कोरोना की दौड़ में

सब कोई दुबक कर घर बैठे।


मैं निकल पड़ा घर से बाहर

कोई तो काम दे देता।


इस विपदा के समय में

कोई सहारा दे देता।


आपदा के इस समय में

अवसर तलाश रहा था मैं।


मरने से पहले

उसको (रोटी) तलाश रहा था मैं।


मुझसे उसकी दूरी इतनी

कि उस तक पहुंच पाया न मैं।


मेरे पेट की ज्वाला को

पानी ने शांत नहीं किया।


मेरे मरने पर

किसी ने कफ़न भी नहीं दिया।


मुझको मेरी मूर्खता पर

कोई इनाम ना देना।


मेरी अंतिम कविता पर

कोई ब्यान ना देना।



ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Tragedy