अंत से अनंत
अंत से अनंत
तेरी शरण में ज़ब से आए
जिंदगी की पतझड़ का अंत हुआ।
मेरा जीवन तो अब जैसे,
कभी न खत्म होने वाला बसंत हुआ।
कभी सोचा भी न था कि,
जिंदगी फिर से मुस्कुराएगी !
तेरी दया सागर से,
आचमन कर जीवन अरिहंत हुआ।
कुछ यूँ बदल सा गया सब,
कि मुश्किलों का अंत तुरंत हुआ !
तेरी भक्ति में खो गए प्रभु,
कि अपना साथ अंत से अनंत हुआ !
