STORYMIRROR

Pratibha Shrivastava Ansh

Romance

3  

Pratibha Shrivastava Ansh

Romance

अनकहा

अनकहा

1 min
240

आधुनिकता के बाज़ार में

बिकते है आज रिश्तें भी

स्वार्थ के आशियाने में

टिकता नहीं कोई रिश्ता

पल-पल बदलते लोग अब

पल-पल बदलते रिश्तें है

कैसे स्वीकार लूँ इस दुनिया में

रिश्ते बेईमान होते है

जिंदा है वो अब तक साँसों में

जो अनकहा एक रिश्ता था



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance