Pratibha Shrivastava Ansh
Abstract
कवि ने आँसू भरी,
एक कविता लिखी
पत्रकारों ने,
खूब समाचार बटोरी
प्रशासन ने ऐलान किया
डॉक्टर-पुलिस,
अपने काम पर अडिग
और
निम्न तबका लौट रहा,
घर की तरफ
पैदल,भूखे पेट
बस चल ही रहा,
कहीं तो पहुँचेगा
लिखो जिसको,
जो लिखना है
बस लिख डालो।
कुछ ना बदला
मजदूर
गांधारी
होलिका
अहसास
बसन्त
बसंत
अनकहा
इश्क
शिकायत
दीपक जलाते, मैं चल रहा हूँ जीवन बनाते, मैं चल रहा हूँ। दीपक जलाते, मैं चल रहा हूँ जीवन बनाते, मैं चल रहा हूँ।
लाल रंग की चुनरी मैया को खूब भाए। लाल-लाल पुष्प मस्तक व चरण पर शोभे। लाल रंग की चुनरी मैया को खूब भाए। लाल-लाल पुष्प मस्तक व चरण पर शोभे।
प्रियतमा हो! उनकी यह मान बैठी मन में, संगिनी बन धीरे – धीरे साथ में ढल रही हो प्रियतमा हो! उनकी यह मान बैठी मन में, संगिनी बन धीरे – धीरे साथ में ढल रही...
मुरली धर इसी दिन गौ माता को चराया था। माँ-बाबा ने पूजन करके, वन में इनको पठाया था। मुरली धर इसी दिन गौ माता को चराया था। माँ-बाबा ने पूजन करके, वन में इनको पठाय...
सेवा हो निस्वार्थ भाव, सेवा हो भक्ति त्याग भाव। सेवा हो निस्वार्थ भाव, सेवा हो भक्ति त्याग भाव।
त्योहारों के बहाने जीवन में सदा ही, लेकर आये जोश और उत्साह सदा हम। त्योहारों के बहाने जीवन में सदा ही, लेकर आये जोश और उत्साह सदा हम।
और तूमने गले लगा लिया तो उनके लिये तुम आशीष बन के आती हो और तूमने गले लगा लिया तो उनके लिये तुम आशीष बन के आती हो
मन की अंतर्दशा का क्या कहना, अंतर्द्वंद्व का जैसे ठिकाना हो। मन की अंतर्दशा का क्या कहना, अंतर्द्वंद्व का जैसे ठिकाना हो।
छोड़ दे इसका मोह, समय बचा हैं कितना मिट्टी के इस काया से मत कर प्यार इतना छोड़ दे इसका मोह, समय बचा हैं कितना मिट्टी के इस काया से मत कर प्यार इतना
कल्पनाओं के विस्तृत नभ को पारकर, जब जीवन की गहराई को माप सकूँ। कल्पनाओं के विस्तृत नभ को पारकर, जब जीवन की गहराई को माप सकूँ।
सौ साल की जगह.... मेरा जीवन भी केवल एक ही दिन का होता। सौ साल की जगह.... मेरा जीवन भी केवल एक ही दिन का होता।
माँ बाप को घर से बाहर का रास्ता दिखाते इन प्राणियों में माँ बाप को घर से बाहर का रास्ता दिखाते इन प्राणियों में
सत्य पथ पर चले और मर्यादा से रहे, ताकि हंसते हुए मिटे सारे गम सत्य पथ पर चले और मर्यादा से रहे, ताकि हंसते हुए मिटे सारे गम
शुभता का ये लाल रंग, मंगल करे जीवन ढंग, जोश और जुनून लेकर आये, पुलकित हो अंग अंग। शुभता का ये लाल रंग, मंगल करे जीवन ढंग, जोश और जुनून लेकर आये, पुलकित ह...
सदियों झेल रहे अपने हिस्से का सुख दुःख, तू पीड़ा के सागर में, सीप सी प्रीत लेना। सदियों झेल रहे अपने हिस्से का सुख दुःख, तू पीड़ा के सागर में, सीप सी प्रीत ले...
भारत के त्योहारों में, दिखती विशेषता है, भेदभाव भुलाकर दिखती यहाँ समानता है, भारत के त्योहारों में, दिखती विशेषता है, भेदभाव भुलाकर दिखती यहाँ समानता है,
ममता से भरा दरिया, सागर से भी गहरा सागर है माँ। ममता से भरा दरिया, सागर से भी गहरा सागर है माँ।
सुने उनके गीत बहाएँ उनके गीतों की गंगा सजायें महफिलें सुने उनके गीत बहाएँ उनके गीतों की गंगा सजायें महफिलें
वह तो सबसे आगे दिखे जो पर्यावरण को रोते हैं, वह तो सबसे आगे दिखे जो पर्यावरण को रोते हैं,
आये कई बार किनारों पर, फिर दूर होते गए, बसेरों से। आये कई बार किनारों पर, फिर दूर होते गए, बसेरों से।