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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy

अनिश्चित दुनिया

अनिश्चित दुनिया

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इस निश्चित सी लगती दुनिया में सब अनिश्चित है!

और अव्वल ये दुनिया भी!

कब किससे मिलना,

कब किससे बिछड़ जाना, 

कब किसी के इतने करीब आ जाना 

कब किसी के इतने दूर चले जाना!

कभी- कभी ऐसा प्रतीत होना की हम इतने करीब हैं फिर भी वास्तव में बहुत दूर होना!

कभी-कभी ठीक इसके उलट भी होना!

कभी-कभी लगना की हम किसी के लिए कितना मायने रखते हैं 

मग़र वास्तविकता इससे परे होना!

और कभी-कभी ऐसा भी लगना की हम इसके लिए मायने नहीं रखते मग़र हक़ीक़त ठीक इसके उलट होना!

सच में इस अनिश्चित सी दुनिया में सब कुछ अनिश्चित है!

एक ही पल में सबकुछ संदिग्ध सी प्रतीत होती तो एक ही पल में सब सीसे की तरह साफ है।


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