STORYMIRROR

Sonam Kewat

Classics

3  

Sonam Kewat

Classics

अलविदा

अलविदा

1 min
414

बोल रही थी वो कोई मजबूरी है

दूर जाना अब बहुत जरूरी है

कैसे कहें तुझे कि ऐसे मत जा,

दूर जाना हमसे सहा नहीं जाता

तेरे बिना हमसे रहा नहीं जाता।


तू तलब है मेरी इस कदर कि

हमें मंजूर नहीं तेरा ये अलविदा हैं।

जरा मिलने आओं हमसे कभी

बताएंगे किस कदर हम फिदा हैं।


गम हमें भी था अलविदा कहने का

उनकी खुशी के लिए सब वार दिया

खूब रोयीं उस दिन वो मुझे छोड़ कर

उसके दर्द ने अंदर ही अंदर मार दिया।


तू हमसे दूर होकर भी सलामत रहे

इससे ज्यादा और क्या हम कहें

चल तू भी कह दे अभी अलविदा

अब मेरे पास इतना वक्त नहीं है।

दूर जाते हुए देख सकें तुझे

हम तो इतने भी सख्त नहीं है।


कोई खुशी अब सच्ची नहीं लगती

बिना तेरे जिंदगी अच्छी नहीं लगती।

अब कयामत आनेवाली है मेरी

आज ही मुझसे विदा ले लो

मौत का बुलावा है शायद

कहा तुम भी अलविदा ले लो।


जिंदगी ने कहा उस दिन कुछ ऐसा

एक ही बार तो मिलती हूँ मैं

बेमतलब ना मुझे तू बर्बाद कर

कितनी खूबसूरत है जिंदगी।

जरा ये भी तो याद कर


दिल से आवाज आई फिर

अब जो गया उसे जाने दे

तेरा है तो वापस आना होगा।

या फिर भूल जा उसे क्योंकि

जीने का फिर नया बहाना होगा


लो कह दिया उसे दिल से अलविदा

जिसके जाने का मुझे खौफ था।

अब ना होगा डर उसे खोने का

क्योंकि जाने का उसे शौक था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics