STORYMIRROR

Satya Narayan Kumar

Classics

3  

Satya Narayan Kumar

Classics

अकेला

अकेला

1 min
319

हे कान्हा!


मैं अकेला ही सखा बन जाता हूँ।

मैं माखन की मटकी तुम्हें पहुँचा आता हूँ।।


मैं अकेला ही दास बन जाता हूँ।

मैं कमल पुष्प तुम्हें पहुँचा आता हूँ।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics