Satya Narayan Kumar
Classics
हे कान्हा!
मैं अकेला ही सखा बन जाता हूँ।
मैं माखन की मटकी तुम्हें पहुँचा आता हूँ।।
मैं अकेला ही दास बन जाता हूँ।
मैं कमल पुष्प तुम्हें पहुँचा आता हूँ।।
भाई का प्यार
रक्षाबंधन
रोग ऐसा: कोरो...
बेसहारा हूँ
क़यामत
जब ज़रूरी युद...
सपने
जल, प्रकृति औ...
माटी का तन
आत्मा
तुझमें तेरी होकर रहती, मैं तेरे भीतर की नारी हूँ। तुझमें तेरी होकर रहती, मैं तेरे भीतर की नारी हूँ।
गुलमोहर तू यह तो बता सिन्दूरी बन क्यों बसते हो। गुलमोहर तू यह तो बता सिन्दूरी बन क्यों बसते हो।
जीवन के हर पथ पर बेटी सौभाग्य तुम्हारा बना रहे। जीवन के हर पथ पर बेटी सौभाग्य तुम्हारा बना रहे।
हार गए हो चीन से, सन बासठ का युद्ध त्याग सिंहासन नेहरू, बन सन्यासी बुद्ध हार गए हो चीन से, सन बासठ का युद्ध त्याग सिंहासन नेहरू, बन सन्यासी बुद्ध
संवेदना में सुलगता अंदर उबाल मिला "उड़ता"आते वक़्त में आगे काल मिला। संवेदना में सुलगता अंदर उबाल मिला "उड़ता"आते वक़्त में आगे काल मिला।
मां, ममता की मूर्ति, त्याग की मूर्ति होती है मां। मां, ममता की मूर्ति, त्याग की मूर्ति होती है मां।
नहीं बर्दाश्त होती मुझसे और ख़ामोशी आवारा, न सुन सकेगी तू, और न कहने की कोई वजह है। नहीं बर्दाश्त होती मुझसे और ख़ामोशी आवारा, न सुन सकेगी तू, और न कहने की कोई व...
माँ आरम्भ है माँ सृजन माँ को प्रतिपल नमन है। माँ आरम्भ है माँ सृजन माँ को प्रतिपल नमन है।
"आत्मा की आँखें " कैसे ना खुलेगी । पत्थर भी पानी हो जाता है। "आत्मा की आँखें " कैसे ना खुलेगी । पत्थर भी पानी हो जाता है।
पल-पल तुझे सताया है अजनबी तुझे आज फिर घर याद आया है। पल-पल तुझे सताया है अजनबी तुझे आज फिर घर याद आया है।
देशहित गर कुछ करना है शांतचित्त हो घर में रहो। देशहित गर कुछ करना है शांतचित्त हो घर में रहो।
तू मेरी हर्ष है माँ, तू ही सर्वस्व है माँ माँ तू ही सर्वस्व है। तू मेरी हर्ष है माँ, तू ही सर्वस्व है माँ माँ तू ही सर्वस्व है।
ज़रूरतें मेरी मुझे, हर लम्हा मारा करें कब तक ज़िंदा रख सकूँगा मैं ईमान को ज़रूरतें मेरी मुझे, हर लम्हा मारा करें कब तक ज़िंदा रख सकूँगा मैं ईमान को
मैं अभिलाषी, तू मृदु भाषी तेरा स्वर, मदमय, सुरभाषी, मैं अभिलाषी, तू मृदु भाषी तेरा स्वर, मदमय, सुरभाषी,
याद आती है मुझे भी माँ की दिन रात अब वो हक़ीक़त में कहां सपनो में आती है। याद आती है मुझे भी माँ की दिन रात अब वो हक़ीक़त में कहां सपनो में आती है।
मां तो आख़िरकार मां होती है ख़ुदा से कम वो कहां होती है। मां तो आख़िरकार मां होती है ख़ुदा से कम वो कहां होती है।
सेना ने यह संकल्प लिया सेना ने यह संकल्प लिया
सर पे छाया ही है माता-किरदार बहुत घनत्व^.( गहरा ) कवर है सर पे छाया ही है माता-किरदार बहुत घनत्व^.( गहरा ) कवर है
विनती हर जन्म बने मेरी माँ वह है माँ... विनती हर जन्म बने मेरी माँ वह है माँ...
तूने क्या कह दिया, वो रूठ गया, "उड़ता" जा उससे मांग माफ़ी लें। तूने क्या कह दिया, वो रूठ गया, "उड़ता" जा उससे मांग माफ़ी लें।