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भाऊराव महंत

Tragedy

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भाऊराव महंत

Tragedy

अकेला जा रहा

अकेला जा रहा

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छोड़कर हमको अकेला जा रहा है 

मोड़कर वो मुँह हमेशा जा रहा है।

देश की सरहद पे अपनी जान देने

तोड़कर हमसे वो वादा जा रहा है।।



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