अजनबी अपने
अजनबी अपने
दो दिल धड़कते थे एक दूजे के लिए
समय यहाँ रुकता नहीं किसी के लिए
सतरंगी सपने सजाए इन आँखों ने
पूरे किए हर ख्वाब एक-दूजे ने
तेरे बिन गुजारा होता है मुश्किल
ना लगता कहीं भी मेरा यह दिल
क्यारी-क्यारी खिली हर ओर
नाच रहा यह मन चितचोर
एक हवा का झोंका ऐसा आया
हर स्वप्न को उसने तोड़ गिराया
जहाँ छलकता था प्यार ही प्यार
वहाँ विज्ञान ने खड़ी करी दीवार
किसी के लिए किसी के पास वक्त नहीं
अपना गलत भी लगता है सबको सही
शारीरिक उपस्थिति दर्ज करा दी
मानसिकता लोगों की अपंग बना दी
संग-संग होते हुए भी यहाँ
मोबाइल ने साथ पर बंदिश लगा दी
ना दिल धड़के अब एक-दूजे के वास्ते
अंजान बने दो शख्स संग रहकर भी
ज्यों अलग हुए हो दोनों के रास्ते।
