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Shirish Pathak

Romance

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Shirish Pathak

Romance

अजीब सी कशमकश

अजीब सी कशमकश

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445


आज जैसी खुश तुम पहले नहीं थी

और आज जैसी चिंता भी तुमने पहले नहीं दिखाई

 

आज जब तुम मिली ख़ुशी थी तुमको

शायद इस बात की ख़ुशी थी की हम आज फिर मिलेंगे

ख़ुशी इस बात की भी रही होगी तुम अपनी

नजरों से आज मुझे नज़रबंद करना चाहती थी

और कामयाब भी हुई तुम

 

आज जब भी मेरे साथ बैठ रही थी तुम

तुमको सुकून भी था और ख़ुशी भी थी

शायद तुमको यकीन हो गया है मैं

सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हूँ

चाहे जो हो जाए मेरा साथ बस तुम्हारे लिए है

 

ये अजीब सी कशमकश थी तुम्हारे अंदर

तुम खुश तो थी पर चिंता भी साफ़ थी तुम्हारे चेहरे पे

तुमको शायद ये चिंता सताने लगी है

कही हम एक दुसरे के साथ खुश नहीं रह पाए तो

 

हाँ ये चिंता करना सही है तुम्हारा

डरना भी कहीं न कहीं चाहिए हमको

पर जानती हो न तुम मेरे लिए ज़रूरी बस तुम हो

और खासियत है ये तुम जानते हुए

अनजान बने रहना चाहती हो

 

अक्सर तुमको खुद में खोते हुए देखना चाहता हूँ

मगर तुम खो जाती हो न जाने किस जगह

और मैं बस तुम्हारी हँसी में गुम हो जाता हूँ


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