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Anjana Chhalotre

Abstract

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Anjana Chhalotre

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ऐ  सागर

ऐ  सागर

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मैंने कहा 

किसी से न कहना 

पर दूसरे तट जाकर 

मेरे प्रीतम के चरणों में 

मेरी अंतरंग 

पीड़ा रख दी 

तेरे स्पर्श ने 

मेरे बिछोह को 

चुगल दिया

अंतर्मन को उस

किनारे छोड़ आये 

ऐ सागर निर्मोही 

मेरी हया को 

शर्मसार कर 

सरे आम कर दिया.... 



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