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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

"अधूरी कविता की दो बहनें "

"अधूरी कविता की दो बहनें "

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सादर अभिनन्दन :StoryMirrorप्रस्तुति : दैनिक सृजन विधा : कविता शीर्षक :"अधूरी कविता की दो बहनें"घोषणा : स्वरचित मौलिक और अप्रकाशित 

मुख्य थीम: सृजन की नाजुकता। कवि का मन श्रृंगार से प्रकृति तक यात्रा करता है, पर बाहरी दुनिया का हस्तक्षेप — एक आवाज़ — उस तन्मयता को तोड़ देता है। प्रेरणा की दोनों देवियाँ, श्रृंगार और प्रकृति, रूठकर उड़ जाती हैं। यह हर कलाकार के उस क्षण का चित्र है जब एकाग्रता भंग होते ही शब्द खो जाते हैं।

दिनांक :22 सितम्बर 2026 

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"अधूरी कविता की दो बहनें"डॉ लक्ष्मण झा परिमल================मन कहाँ स्थिर रहता है,जब उद्विग्नता के जालों में फँस जाता है,मानस पटल पर कल्पनाओं की फुहारेंअंगड़ाइयाँ लेने लगती हैं।निःशब्द, शांत परिधियों मेंकागज़, कलम, दवात निकल आते हैं!कविता की सुंदर रूपरेखा औरएक अद्भुत छवि उभरने लगती है।शब्दों के श्रृंगार से उसके रूप सजाते हैं,रंग-बिरंगे परिधानों से एक मूर्त रूप देते हैं!!पर उम्र का एहसास हमारीशृंगारिक कविता से दूर हो गया।अब मन बावला प्रकृति केआँचल में मधुप बन गया।कमलिनी के पलक मेंकविता का सृजन करने लगा।किसी ने जोर से आवाज़ दी —हमारी कविता अधूरी रह गई।श्रृंगार और प्रकृति, दोनों बहनें हमसेरूठकर न जाने कहाँ चली गईं?=================डॉ. लक्ष्मण झा 'परिमल'दुमका ,झारखण्ड


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