अच्छी औरत का किरदार
अच्छी औरत का किरदार
अच्छी औरत
होने का किरदार
औरतों के जीन्स में
धागे की तरह होता है।
कुछ किरदार वो चुन लेती हैं
पगडंडियों पर उगे
फूलों की तरह,
और पिरो देती हैं
जिंदगी की राह पर
चलते हुए अकेले
या भीड़ संग हँसते खेलते
बिना कुछ सोचे समझे।
कुछ किरदार
उसे दिए जाते है
जन्म से और जिंदगी भर
तोहफों की तरह
तो कभी तोहमतों की तरह
इन्हें स्वीकारना या छोड़ देना
उसके उस किरदार पर होता है
जो ओढ़ाया जाता है
विधि विधान से
सर पर आँचल की तरह।
पता ही नहीं चलता
कि कब और कहां
हर किरदार
गुंथता चला जाता है
उसके जेनेटिक धागे से
जिसमे
कुछ किरदार फूल जैसे
बंधे रह जाते हैं,
कुछ मुरझा जाते हैं
और कुछ झड़ जाते हैं
या झाड़ दिए जाते हैं।
लेकिन कुछ को
औरत बार बार
सरकता हुआ पाकर सर से
खींचती रहती है
वापस अपने सर पर
स्वतः ही जैसे औरत का
सर और आँचल का किरदार
जीन्स में हो
धागे की।
महीन धागा,
इज़्ज़त के परचम से,
निकला लगता है,
औरत को नहीं
उसके सर को ढकने की,
पहले सोचता है।
