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Rajiv Jiya Kumar

Abstract Inspirational

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Rajiv Jiya Kumar

Abstract Inspirational

अभिनंदन।

अभिनंदन।

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अभिनंदन अभिनंदन 

माँ भारती के उन सब वीरों का

जिन्होंने दुश्मन का सीना चीर दिया

घुसकर मांंद में उनके

मानो उनका चीर हरण किया।।

अभिनंदन अभिनंदन 

खून जमा देने वाली ठंड दिन हो या हो रात

सजग प्रहरी न हो कोई घात

बर्फ की गहरी मोटी चादर

पर ऊफ की कहाँ कोई बात।।


अभिनंदन अभिनंदन 

जो चढ़े सब जोखिम ले

खड़ी चढ़ाई भी सहयोग देते पहाड़ के

दुश्मन नेस्तनाबूद हुए बिन प्रतिकार के

संंभलने दिया कहाँ भारती के लाल ने

उस घनघोर अंधियारी रात में।।


अभिनंदन अभिनंदन 

पैदल चलते वीर जियाले का

जल पर चलते देश के परवाने का

जंगल, खाई, दलदल और

धूप जहाँ नहीं पहुँचती

देश की सीमा की रक्षा को

तत्पर और तैयार 

सहना हो चाहे कोई आघात।।


अभिनंदन अभिनंदन 

गगन का वह सच्चा सिकंदर 

गदर मचा दी उस ऊँचाई पर 

हलचल मची शत्रु खेमे में

उड़ गए पलक झपकते सब

शत्रु के भाव और ताव उनके बेड़े में,

लौट आया मूँछ पर देते ताव

चाल कह रही वीर की

हमारे सामने शत्रुओं तुम्हारी क्या औकात,

अभिनंदन अभिनंदन।।

       


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