STORYMIRROR

Bhavna Thaker

Abstract

3  

Bhavna Thaker

Abstract

अभिनंदन को अभिनंदन

अभिनंदन को अभिनंदन

1 min
272

माँ भारत ने कहा मुस्कुराते 

तू मेरा बहादुर बेटा है


अभिनंदन अनमोल है तू 

इस देश की मांग का टीका है


सरफ़रोशी सीखे कोई तुमसे

देश का फ़ख्र है लाजमी 


दुश्मन ने भी तुम्हारा जज़बा 

अपनी आँखों से देखा है 


जाँबाज़ी का जश्न मनाओ

मेरे देश वासियों


दुश्मन के सख़्त शिकंजे से

एक वीर वापस लौटा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract