STORYMIRROR

SHWETA GUPTA

Fantasy

3  

SHWETA GUPTA

Fantasy

अभिमन्यु के उद्गार

अभिमन्यु के उद्गार

1 min
468

माँ सुभद्रा को पिता अर्जुन से मिलाया,

हे कृष्ण! आपका अभिनन्दन।

माँ द्रौपदी की लाज को सभा में बचाया,

हे कृष्ण! कृतज्ञ अंतर्मन।

सारथी बन पिता अर्जुन का रथ चलाया,

हे कृष्ण! आपका वंदन।

गर्भ में ही मुझे चक्रव्यूह भेदन सिखलाया,

हे कृष्ण! आभार भगवन।

छः द्वार भेदे, सप्तम पर अपनों ने गिराया,

हे कृष्ण! हुआ विह्वल मन।

क्यों मैंने सच्चाई से न आपको बुलाया,

हे कृष्ण! यह मेरा क्रंदन?

क्या था सप्तम द्वार पर मुझमें 'मैं ' समाया,

हे कृष्ण! करूँ स्वयं से प्रश्न?

कदाचित मुझे मेरे ही 'मैं ' ने हराया,

हे कृष्ण! छूटा श्वासों का बंधन।

मुक्त आत्मा ने गौ लोक का पथ अपनाया,

हे कृष्ण! हुए आपके दर्शन।

नमन। आपको नमन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy