Dr.Shree Prakash Yadav
Drama
ज़िंदगी,
प्रत्येक पल,
पल्लवित हो,
मैंने,
देखा,
नहीं,
ऐसा,
अभी तक,
किसी जन को।
21 मार्च कवित...
अलविदा2022
चाहिए
जीवन
कविता
जीवनगत अनुभूत...
प्रियतमा
पापा
मैं फकीर हूँ
जीवन का महत्व
तथाकथित दिग्गज नाट्याभिनेताओं को अक्सर बड़ी कुशलतापूर्वक अपना-अपना झूठा किरदार तथाकथित दिग्गज नाट्याभिनेताओं को अक्सर बड़ी कुशलतापूर्वक अपना-अपना झूठा कि...
फिर एक पल एहसास करने की कोशिश करता हूँ फिर एक पल एहसास करने की कोशिश करता हूँ
चलते चलते नहीं उलझ दुनियादारी भँवर इसमें उलझेगा तो कैसा पायेगा, तू निर्झर चलते चलते नहीं उलझ दुनियादारी भँवर इसमें उलझेगा तो कैसा पायेगा, तू निर्झर
मगर किसको मिलेगी ये तो समय ही बताएगा मगर किसको मिलेगी ये तो समय ही बताएगा
जिस दिन तू जाये, जग छोड़कर खुदा, मुझे भी बुला ले उस, वक्त पर जिस दिन तू जाये, जग छोड़कर खुदा, मुझे भी बुला ले उस, वक्त पर
जब कोई किसी से जलन करता है। तो वही उसकी खुशियों का क़ातिल हो जाता है। जब कोई किसी से जलन करता है। तो वही उसकी खुशियों का क़ातिल हो जाता है।
बिलों में छिपे हुए गद्दारों को खत्म करना है। देश के जयचंदों का अब फन कुचलना है। बिलों में छिपे हुए गद्दारों को खत्म करना है। देश के जयचंदों का अब फन कुचलना ह...
लो उनको साथ जो रोके राह तुम्हारी तोड़े तुम्हारे बुलंद हौसलों को लो उनको साथ जो रोके राह तुम्हारी तोड़े तुम्हारे बुलंद हौसलों को
हिंदी नववर्ष को कहते है, विक्रम संवत ईसा पूर्व से चला, हमारा नववर्ष उत्कर्ष हिंदी नववर्ष को कहते है, विक्रम संवत ईसा पूर्व से चला, हमारा नववर्ष उत्कर्ष
गिले-शिकवे हुए दूर होली में प्रेम जारी रे गिले-शिकवे हुए दूर होली में प्रेम जारी रे
काम-क्रोध भी मेरे हृदय जगते, कुछ अनजाने में हो जाते पाप।। काम-क्रोध भी मेरे हृदय जगते, कुछ अनजाने में हो जाते पाप।।
सृजनकर्ता मां रूपी उक्ति है मातारानी का हर रूप स्त्री है सृजनकर्ता मां रूपी उक्ति है मातारानी का हर रूप स्त्री है
कैसे यकीन करें, साखी अब किसी पर। लोग गिरगिट से ज्यादा रंग बदल लेते है।। कैसे यकीन करें, साखी अब किसी पर। लोग गिरगिट से ज्यादा रंग बदल लेते है।।
विकसित भारत और भारत-लोकतंत्र की मातृका थीम जिसकी है विकसित भारत और भारत-लोकतंत्र की मातृका थीम जिसकी है
बुढ़ापे से पूर्व जवानी में हो जा, तू बड़े लोग शीशे तोड़ते, अक्स के करा, झगड़े बुढ़ापे से पूर्व जवानी में हो जा, तू बड़े लोग शीशे तोड़ते, अक्स के करा, झगड़े
वो पलायनवादी मनोभाव के अत्यंत आराम परस्त व्यक्ति हैं। वो पलायनवादी मनोभाव के अत्यंत आराम परस्त व्यक्ति हैं।
चुप से इस बात की तमीज ले।। कर्म का ढिंढोरा पीटने से अच्छा। चुप से इस बात की तमीज ले।। कर्म का ढिंढोरा पीटने से अच्छा।
बस रहना होगा अपने शरीर में बने इसके घर के साथ बस रहना होगा अपने शरीर में बने इसके घर के साथ
तुम्हारी धड़कन को सुनकर, हम इश्क का तराना गाते है। तुम्हारी धड़कन को सुनकर, हम इश्क का तराना गाते है।
दिल अब वैसे ही दर्द में बड़ा था जख्मी अपनों के शब्दों से ही तो दिल अब वैसे ही दर्द में बड़ा था जख्मी अपनों के शब्दों से ही तो