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Dr.Shree Prakash Yadav

Abstract Others

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Dr.Shree Prakash Yadav

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कविता

कविता

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क्षत - विक्षत

अब- अपोहन

चिंता - हरण

जिजीविषा- या

हादसों के शहर में

नब्ज जाने नहीं

पहचानने का दावा कर

मुकम्मल कविता ----?


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