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Sugan Godha

Abstract

4.4  

Sugan Godha

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अभी बाकी हैं

अभी बाकी हैं

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अभी न होगा खत्म किस्सा मेरा,

हर नारी में है कुछ हिस्सा मेरा !

न करना दफ्न मुझे अभी तुम ,

अभी सांसे मेरी अभी बाकी है !!

रंगो से सजा संसार पराया है, 

रंग अपने अभी मुझे संजोने है !

जाने पहचाने कितने चेहरे हैं, 

पहचान मेरी अभी बाकी है !!

अब तक बस जी रही थी मैं ,

जीवन औरों के लिए बिताया !

मेरे चेहरे की हंसी थी परायी, 

मुस्कुराहट मेरी अभी बाकी है !!

कितनी घटाएँ घिर घिर आयी ,

बादल कितने ही बरस गए !

मन को जो शीतल कर जाए ,

वो बारिश तो अभी बाकी है!!

थक कर अभी मैं रुकी कहां ,

चलना अभी मैंने छोड़ा नहीं !

मंजिल मेरी हैं दूर तो क्या ,

मुझमें उम्मीद अभी बाकी है !!



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