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Sugan Godha

Crime


4.8  

Sugan Godha

Crime


दलित की बेटी

दलित की बेटी

1 min 357 1 min 357

क्या दोष मेरा था बस यही ?

मैं बेटी दलित की थी !

माँ भाई संग मैं खेत में,

घास इकट्ठा कर रहीं थी !

खींच दुपट्टा गले से मेरे,

घसीट ले गए दूर मुझे !

संग बर्बरता इतनी की,

बायां भी मैं न कर सकूँ !

दरिंदों ने ऐसी दरिंदगी की,

भक्षण पहले मिलकर किया !

नोच-नोच मुझे इतना खाया,

आत्मा को मेरी रौंद दिया !

हड्डियां तक न छोड़ी मेरी,

भूखे इतने वो भेड़िये थे !

दर्द अपना सुना न सकूँ,

जुबां को मेरी काट दिया !

न लड़ सकीं पचासों से,

जिंदगी से भी हार गयी !

इंसाफ मिलेगा क्या अब मुझे,

आत्मा मेरी पूछ रही !

क्या दोष मेरा था बस यही ?

दलित की मैं बेटी थी !!



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