अब कौन एहसासों में प्यार रखता!
अब कौन एहसासों में प्यार रखता!
अब कौन भला एहसासों में प्यार की ख़ुशबू बोता है!!
लद गये ज़माने जब मोहब्बत को फूलों से दर्शाते थे...
अब कौन भला एहसासों में प्यार की ख़ुशबू बोता हैं!
वो वक़्त गया मोहब्बत के इज़हार में वर्षों लगते थे...
अब तो एक मुलाक़ात में इंसान जन्मों के वादे करता है!
विवाह के गठबंधन की हीरक जयंती भी मनाते थे...
आजकल आज तू तो कल कोई और का ज़माना है!
त्वरित युग में खाने की तरह प्रेमी भी जल्दी मिलते है...
सुप्त हो रही मर्यादा, भावनाएँ बस स्वार्थ पहले आता है!
रिश्तों सहनशीलता की कमी और सबको उत्तम चाहिए..
अब कौन भला एहसासों में प्यार की ख़ुशबू बोता है।।
