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भावना भट्ट

Inspirational

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भावना भट्ट

Inspirational

अब और नहीं

अब और नहीं

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डर-डर कर बहुत जी लिया अब और नहीं

मौन रहके कर दिखाना है, करना है शोर नहीं


माना जीवन में अंधकार छाया है अभी

जो उम्मीद की रोशनी कर दे, क्या कोई ऐसी भोर नहीं


अभी बन्धनों में बँधी हूँ, तब भी जिद पर अड़ी हूँ

आएगा वक़्त जब होगा मेरी ऊँचाइयों का कोई ठौर नहीं


मेरा नाम भी इस जहां में चमकेगा इक दिन

तो क्या हुआ जो अभी मेरा दौर नहीं


जिन्होंने कम आँका है वो ही आएंगे दर पर

तो क्या हुआ जो अभी करते गौर नहीं।


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