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Richa Baijal

Abstract

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Richa Baijal

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आज़ादी की खुशबू

आज़ादी की खुशबू

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हाथों की ज़ंज़ीरे तोड़ दो 

मुझे इस जहाँ में कुछ पल को खुला छोड़ दो 


न व्यर्थ की दीवारें हो 

न कोई बंदिशे हों 

बस, एहसासों के किनारे हों 


सपने बहुत सारे हों 

न मेरा और तुम्हारा हो 

एक जहाँ हो जो बहुत प्यारा हो


हाथों की ज़ंज़ीरे तोड़ दो 

मुझे इस जहाँ में कुछ पल को खुला छोड़ दो।


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