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Amit Kumar

Abstract Fantasy

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Amit Kumar

Abstract Fantasy

आसमां भिगो रहे हो.!

आसमां भिगो रहे हो.!

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सब कुछ जलकर खाक बचा हूँ

इतनी तफतीश मत करो।

कुछ यादें मिल गयीं तो,

बहुत मुश्किल हो जाएगी।


बचे हुए खाक को टटोल रहे हो,

ऐसा लगता है यादों को खोज रहे हो,

अभी गनीमत है ठहर जाओ,

हाथ में आंसू लेकर आसमां भिगो रहे हो


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