आपदा को न अवसर बनाओ यारों
आपदा को न अवसर बनाओ यारों
आपदा को न अवसर बनाओ यारों,
विपदा में न मुझको भुलाओ यारों।
क्या नैतिक तुम्हारा पतन हो गया है,
क्या तुमने मुझको भूला ही दिया है।
क्या नैतिक जिम्मेदारी तुम्हारी नहीं है।
क्या यारी अब हमारी तुम्हारी नहीं है।
वसुधैवकुटुंबकम् को न हम भूलें यारों,
अपने अंदर की तृष्णा को अब तो मारो।
मेरी प्रार्थना है कि खुश सदा ही रहना।
चाहे कितना भी गम दे ये सारा जमाना।
खुद सही हैं तो सारा जमाना भी सही है।
प्रार्थना है प्रभु से मुझे मौज में ही रखना।
