आओ मेरे वीर जवानों
आओ मेरे वीर जवानों
आओ मेरे वीर जवानों तुमको एक कथा सुनाती हूँ
गर्व से तन कर खड़े तिरंगे का इतिहास बताती हूँ
आसमान में छाया परचम बस रंगों का मेल नहीं
आज़ादी की सांसें लेना है बच्चों का खेल नहीं
इस झंडे के केसरिया में कितने केसरी बाने हैं
छाती चीर के दुश्मन की ,वीरों ने सीने ताने हैं
उन शहीदों को याद करो जो नींव में खुद को रोप गए
सीने में खंजर खाकर भी आज़ाद देश को सौंप गए
वो माँ का राज दुलारा था उसकी आँखों का तारा था
बूढ़े होते बाप की लाठी, घर का एक सहारा था
रहे तिरंगा फहराता ये ठानके ख़ुद को झोंक दिया
खाई गोली सीने पर लेकिन कितनों को भाला भोंक दिया
आंखों में थाम के आंसू को माता ने सीना तान लिया
मेरी कोख फलवती आज हुई गर्व से इसको मान लिया।
देखो एक तस्वीर धवल जिसमें दुल्हन है लाल सजी
हाथों पर मेहंदी सूखी नहीं अभी अभी शहनाई बजी
एक काले संदेसे ने उसकी दुनिया को चीर दिया
धरकर गोदी में सिर उसका बोली मेरा वीर पिया
अपनी मांग के लाल रंग से उसके मस्तक पर तिलक किया
कांधे पर रख अपना सुहाग भारत का जयजयकार किया
वो देख रहे हो हरारंग जो विश्वास की खेती बोता है
उस हरियाली में बीज बना शहीद पिता भी सोता है
नन्हे बालक ने तुतलाती जिह्वा से पापा बोला है
कागज़ की तस्वीर से अपने बाप का जिगरा तोला है
वो देख रहा तिरंगे में लिपटा पापा का चेहरा है
जो आज देश के मस्तक पर सजा हुआ सा सेहरा है।
वो चक्र देख रहे हो तुम? जो 24 धारी वाला है
वो राखी है एक बहना की भाई की वो गलमाला है
जो आज तिरंगा लहराकर हम मिलकर जश्न मनाते हैं
जाने कितने परिवारों के बलिदानों को बिसराते हैं
मत भूलो मेरे नौजवान क्या आज़ादी का मोल है
मेरे देश में छाया तीन रंग ये रंग बड़े अनमोल हैं
मेरे देश की मिट्टी के कण कण में इनसे सजी दीवाली है
स्वतंत्र हिन्द का हीरक उत्सव छाई हुई खुशहाली है।
तुम भारत का आज हो बच्चों तुम भारत का ताज हो
कुछ ऐसा करना जीवन में धरती को तुम पर नाज हो
तुमसे है भारत तुम भारत हो तुम इसकी आवाज हो
बढ़ते रहना कर्मपथ पर पंख तुम्हीं ,तुम परवाज़ हो।
