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Brajendranath Mishra

Abstract

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Brajendranath Mishra

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आओ मेरे जग में साथी

आओ मेरे जग में साथी

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तुम हो किस ग्रह के साथी,

आओ मेरे जग में साथी।


देखो इस नवीन धरा को,

हरे भरे बागों को देखो,

देखो ताल तलैया को

रंगीन परागों को देखो।


हम उन्मुक्त वासी हैं जग के

यहाँ न कोई बंधन है।

हम नाचते गाते है खुलकर

यहाँ न कोई उलझन है।


मेरे साथ गुजारो कुछ पल

आओ मेरे संग में साथी।

आओ मेरे जग में साथी।


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